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चैत्र नवरात्रि इस बार खास: पंचक और ग्रहों के अनोखे संयोग से बढ़ेगा फल, ज्योतिषाचार्यों ने बताया खास महत्व
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से वासंती नवरात्र की शुरुआत मानी जाती है। इस बार 19 मार्च, गुरुवार से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह नवरात्रि कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि इसमें तिथि और ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग बन रहे हैं।
इस बार नवरात्र पूरे 9 दिनों के रहेंगे, जिससे हर दिन अलग-अलग नक्षत्र और योग का प्रभाव देखने को मिलेगा। मान्यता है कि ऐसे संयोग साधना और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
पंचक नक्षत्र में शुरुआत, बढ़ेगा पुण्यफल
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्रि का आरंभ उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में हो रहा है, जो पंचक का हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में पंचक के दौरान की गई साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस समय की गई पूजा और उपासना सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी होती है। नवरात्रि के दूसरे दिन रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो सिद्धि देने वाला योग माना जाता है।
दुर्लभ ग्रह संयोग बना रहे इसे खास
इस बार नवरात्रि के दौरान ग्रहों की स्थिति भी काफी विशेष है। मीन राशि में सूर्य, शनि और शुक्र एक साथ हैं, वहीं कुंभ राशि में बुध, मंगल और राहु की युति बन रही है।
ज्योतिष के अनुसार इस तरह के ग्रह संयोग बहुत कम बनते हैं। गणनाओं के मुताबिक, ऐसा योग कई दशकों में एक बार ही देखने को मिलता है, जिससे इस नवरात्रि का महत्व और बढ़ गया है।
प्रकट नवरात्रि का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में चार नवरात्र होते हैं—दो गुप्त और दो प्रकट। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र ‘प्रकट नवरात्र’ कहलाते हैं, जिनमें देवी की उपासना खुलकर की जाती है।
इस दौरान साधक और भक्त विशेष पूजा, व्रत और अनुष्ठान करते हैं। इसे घर-परिवार के लिए सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का समय माना जाता है।
साधना के लिए अनुकूल समय
धर्मग्रंथों के अनुसार यह समय केवल साधकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम गृहस्थों के लिए भी पूजा-पाठ और आध्यात्मिक अभ्यास का उत्तम अवसर होता है।
नवरात्रि के इन 9 दिनों में देवी की आराधना, पाठ, मंत्र जाप और व्रत करने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।